गुलज़ार -

गुलज़ार जी का नाम हिंदी व उर्दू जगत में कौन नहीं जानता इनका पूरा नाम समपूरन सिंह कालरा है इन्होने कई हिंदी फिल्मो के लिए भी कई गीत लिखे है जिसकी वजह से आज यह पुरे विश्व में जाने जाते है | इनका जन्म 18 अगस्त 1934 में पकिस्तान में हुआ था इन्होने अपनी रचनाओं को हिंदी, उर्दू व पंजाबी में भाषाओ में लेखन किया है | इसीलिए हम आपको गुलज़ार जी द्वारा लिखी गयी कुछ शायरियो के बारे में बताते है जो की आपके लिए काफी महत्वपूर्ण है जिन्हे पढ़ कर आप इन के बारे में काफी कुछ जान सकते है |


1. मैं तेरे इश्क़ की छाँव में जल-जलकर काला न पड़ जाऊं कहीं,
तू मुझे हुस्न की धूप का एक टुकड़ा दे..!




2. कोई पुछ रहा हे मुजसे मेरी जीन्दगी की कीमंत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना




3. शायर बनना बहुत आसान है,
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए




4. अगर कभी थक जाओ तो हमसे कहना,
हम उठा लेंगे तुमको अपनी इन बाहों में,
आप एक बार प्यार करके तो देखो हमसे,
हम सारी खुशियां बिछा देंगे आपकी राहों में





5. पलक से पानी गिरा है,
तो उसको गिरने दो
कोई पुरानी तमन्ना,
पिंघल रही होगी!!"





6.ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की... और कहेना,
के कफ़न की ख्वाहिश में मेरी लाश
उनके आँचल का इंतज़ार करती है......





7.बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है...





8.कोई पुछ रहा हे मुजसे मेरी जीन्दगी की कीमंत....
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना....





9.बीच आस्मां में था
बात करते- करते ही
चांद इस तरह बुझा
जैसे फूंक से दिया
देखो तुम…
इतनी लम्बी सांस मत लिया करो





10.कैसी ये मोहर लगा दी तूने...
शीशे के पार से चिपका तेरा चेहरा
मैंने चूमा तो मेरे चेहरे पे छाप उतर आयी है उसकी,
जैसे कि मोहर लगा दी तूने...
तेरा चेहरा ही लिये घूमता हूँ, शहर में तबसे
लोग मेरा नहीं, एहवाल तेरा पूछते हैं, मुझ से !!




11. बस तेरा नाम ही मुकम्मल है
इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी




12. तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी, हैरान हूँ मैं
ओ हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैं
ओ परेशान हूँ मैं




13. 

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