जॉन एलिया उर्दू के एक महान शायर हैं। इनका जन्म 14 दिसंबर 1931 को अमरोहा में हुआ। यह अब के शायरों में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले शायरों में शुमार हैं। शायद, यानी, गुमान इनके प्रमुख संग्रह हैं इनकी मृत्यु 8 नवंबर 2004 में हुई। जौन सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं हिंदुस्तान व पूरे विश्व में अदब के साथ पढ़े और जाने जाते हैं।
1. अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
2. अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुबा
मेरा तिरा मोआ'मला इश्क़ के बस का था नहीं
3. अपने सर इक बला तो लेनी थी
मैंने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
4. अपने सर इक बला तो लेनी थी
मैंने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
5. अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछनहीं आसमान में रक्खा
6. अब ख़ाक उड़ रही है यहाँ इंतिज़ार की
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर किसी जान-ए-जहाँ के थे
7. अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी
रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर
8. आईने को ज़ंग लगा
अबमैं कैसा लगता हूँ
1. अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
2. अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुबा
मेरा तिरा मोआ'मला इश्क़ के बस का था नहीं
3. अपने सर इक बला तो लेनी थी
मैंने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
4. अपने सर इक बला तो लेनी थी
मैंने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
5. अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछनहीं आसमान में रक्खा
6. अब ख़ाक उड़ रही है यहाँ इंतिज़ार की
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर किसी जान-ए-जहाँ के थे
7. अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी
रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर
8. आईने को ज़ंग लगा
अबमैं कैसा लगता हूँ

Comments
Post a Comment