मैं हूं ना पसंद सबको
बहुत बोलता हूं सब कहते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
ये दर्द-ए-ग़म जिंदगी का हिस्सा है
तो क्यों ना इन्हें हंसकर सहते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
जो समझता ही नहीं क्यों समझाए उसे
ना जिक्र करते हैं ना उसका नाम लेते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
दुनिया की तरह पत्थर करते हैं दिल को
रेत के बने मकान तो अक्सर ढ़हते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
ये जो आंसू है इन पर भरोसा क्यों करें
ये तो खुशी और गम दोनों में बहते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।।।
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।।।
बहुत बोलता हूं सब कहते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
ये दर्द-ए-ग़म जिंदगी का हिस्सा है
तो क्यों ना इन्हें हंसकर सहते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
जो समझता ही नहीं क्यों समझाए उसे
ना जिक्र करते हैं ना उसका नाम लेते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
दुनिया की तरह पत्थर करते हैं दिल को
रेत के बने मकान तो अक्सर ढ़हते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।
ये जो आंसू है इन पर भरोसा क्यों करें
ये तो खुशी और गम दोनों में बहते हैं,
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।।।
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।।।
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